
Talking Mirror
प्रीति जी, आपने लिखा मैं को देख पाना और अहंकार का पीछा छोड़ने की यात्रा पर हूँ, यही ईमानदार भाषा है, मंज़िल का दावा नहीं, रास्ते की बात। ध्यान इस पर रखिए, यह यात्रा हर दिन नए सिरे से चलनी है, आज देख लिया इसका मतलब कल भी देख लेंगे नहीं होता। सत्रों और परीक्षाओं में लगे रहिए, वही जगह है जहाँ यह देखना बार बार परखा और गहरा होता है। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cm…















