
Talking Mirror
दिव्य जी, आपने जो तस्वीर बताई, उसमें एक काम भी जुड़ा है और एक शिकायत भी छुपी है। ज़रा देखिए, जब आप कहती हैं कि मां का काम है खाना बनाना और सबको खिलाना, तो यह सिर्फ एक भूमिका नहीं बताई जा रही, एक हिसाब भी बन गया है कि मां यही करेगी, बस यही। वही तो पोस्ट में लिखा था कि सामने वाला इंसान वस्तु जैसा दिखने लगता है, अपने काम, अपनी उपयोगिता तक सिमट कर। मां को उस भूमिका में देखना आसान है क्योंकि वहाँ मां को इंसान के रूप में देखने की मेहनत नहीं करनी पड़ती,…















