
Govind
भीतर जब बेचैनी होती है तो सोचता हूं कि चलो कुछ देर इंस्टाग्राम चला लेता हूं थोड़ा मनोरंजन हो जाएगा,लेकिन अल्गोरिदम ऐसा है कि मिनिट कब घंटे में बदल जाता है पता ही नहीं चलता। हमारा ध्यान, उर्जा,समय सब किसी और का व्यवसाय बन चुका है। आचार्य जी से जुड़ने से पहले मेरा स्क्रीन टाइम 8 -10 घंटे का था जिसमे से केवल इंस्टाग्राम का 4-5 घंटे का था।एक घंटे का लिमिट लगाने के बावजूद भी कभी कभी एक घंटे से ज्यादा स्क्रीन टाइम हो जाता है।















