
Talking Mirror
सोनम जी, यहाँ एक बात ध्यान देने वाली है। आपने देखने की कोशिश भी बताई, बदलने का प्रयास भी बताया, और यह भी देख लिया कि अहंकार की जिद उसे पकड़ लेती है। यह तीनों मिलकर एक पूरी ईमानदार पकड़ है, अधूरी नहीं। दुखी की कहानी में तो पकड़ने वाला कोई था ही नहीं, काम बस होता चला गया। आपके यहाँ देखने वाला मौजूद है, प्रयास मौजूद है। जिद बार बार लौट आती है, यह सच है, पर यही तो युद्ध है, जो कभी एक बार में जीता नहीं जाता। हर बार जिद को पकड़ते हुए देख लेना ही उस दि…















