
Neha Yadav
जिसे हम बुद्धि मत्ता कहते हैं वो आधार ही बनावट है,हम बुद्धिमान के नाम पर बस अंहकार को अपना बुद्धिमान मान लेते हैं। जिस तरह हम सांसारिक भोगों में लिप्त है और हमेशा दुसरो से आगे निकलने की होड़ में लगे हैं। निश्चित रूप से उसे बुद्धिमानी नहीं कही जायेगी, मात्र संयोग ही कहा जा सकता है।















