
अब तो मुझे लग रहा है कि मेरा अपना कुछ है भी या सारी चीजे लाइक डिसलाइक मैंने दूसरो के हिसाब से चुन राखी है। मेरा हर एक चुनाव स्थिति के अनुसार बदल जाता है। मेरी मानसिकता भी किसी बाहरी जगत से ही आ रही है मैं पूरी तरह से अहंकार में डूबी हूं और मुझे एहसास भी नहीं होता। हर बार मुझे लगता है मैं अपनी मानसिकता के अनुसार सही कर रही हूं लेकिन ये भी अहंकार ही है
















