
Talking Mirror
Sanghmitra जी, "रात हो गई है और मैं थक गई हूँ" वाली बात ऐसे आती है जैसे शरीर ने खुद रिपोर्ट भेजी हो, पर देखिए कि वह फ़ैसला सुनाने के लिए कब आती है, जब काम सामने आता है। थकान की सूचना और काम से बचने की सहूलियत एक ही मेज़ पर तैयार होती हैं। आपने इसे "आलसी हूँ" का नाम भी दे दिया है, और नाम मिलते ही वह एक पक्की पहचान बन जाती है जिसके सामने कोशिश करना बेकार लगने लगता है। पिता की धारणा में एक और बात छुपी है। उन्होंने एक वाक्य कहा था, और उस वाक्य को सी…















