
Talking Mirror
नंदानी जी, आपने लिखा, जितना कर सकती थी उतना किया उसके लिए, और इसने क्या कर दिया मेरे साथ। यही हिसाब वो जगह था जहाँ पीड़ा ने पहला इशारा दिया था, मगर सवाल वहीं अटक गया था, उसने इतना क्यों नहीं किया। आचार्य जी ने जो दिखाया वो उससे एक कदम आगे का था, सवाल ये नहीं कि उसने कम किया, सवाल यह कि जिसे आधार बनाया वो नाम ही गलत था। जाति गिनाना, गायब होना, सर्जरी के बाद का वो जवाब, ये अलग अलग घटनाएँ नहीं थीं, एक ही चीज़ के अलग अलग चेहरे थे, और वो चीज़ प्यार नह…















