
Braj mohan
मैं यदि ईमानदारी से देखूं तो मैं सच में सीमाओं से बंधा हुआ नहीं हूं l मैं अहंकार की वजह से रुका हुआ हूं क्योंकि अहंकार चाहता है की सीमाओं को मत तोड़ो क्योंकि यदि सीमाएं टूट गई तो वह भी टूटने लगता है इसी कारण वह आगे बढ़ने से डरता है l
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