
Rekha bisht
पढ़कर बहुत अच्छा लगा। सास बहू का इतना सुन्दर रिश्ता मैं पहली बार देख रही हूँ। आचार्य जी की शिक्षा है ही इतनी बलवती कि जो सीख गया, समझ गया। उन सब को एक नया जीवन मिल गया सयझो। गीत सुना था। सूरज नबदला, चंदा न बदला। न बदला ये आसमान, कितना बदल गया इंसान। बदलाव कुछ नया हो, तो अच्छा लगता है।















