
Anuradha Walia
इंसान स्वयं को सबसे 'श्रेष्ठ' समझता है। परंतु वह सबसे श्रेष्ठ नहीं सबसे 'कठोर' है। इंसान अपनी 'झूठी मान्यताओं' को पूरा करने के लिए किसी भी 'हद' तक जा सकता है। स्वयं के अलावा उसके लिए किसी का 'दुख' किसी की 'पीड़ा' कोई 'मायने' नहीं रखती है।















