
Shubhra Edake
आचार्य जी को सुनने से पहले मैं भी ऐसे ही प्रश्नों में उलझी थी, की ये सब कुछ (ब्रह्मांड, जन्म –मृत्यु, रोना– हंसना, मैं........) है ही क्यों? तो आचार्य जी के एक प्रश्न ने सब तोड़ दिया था, वो प्रश्न यह था कि, किसे लग रहा है कि ये सब है? (ये सब कुछ जिसे लग रहा है,वो क्योंन है?) ------------------- ❓आपके जीवन में ऐसे कौन-से सवाल हैं, जिनमें उलझकर आप अपनी मूलभूत समस्या को देखने से बच रहे हैं? 👀उत्तर→ पहले क्योंनसा करु ये करु की ये?















