
Pratibha Verma
मैं अपनी नजर से देखने कि कोशिश मे हु। मुझे लगता है कि मुझे फर्क नहीं पड़ता न किसी कि नजर का न कोई ये कहे कि सुन्दर हो। लेकिन कही न कही अहंकार अपनी चाल चल ही जाता है, एक छुपी हुई चाहत तो फिर भी बनी ही रहती है इसलिए यह कहना गलत होगा कि पूरी तरह से इससे मुक्त हु।















