
Tanu
हमने कभी ईमानदारी से देखा ही नहीं l इसकी आदत सी पड़ गई हैं l बचपन से जो करते आए हैं , समाज हमे बताता है वही सत्य लगता है l अब धीरे-धीरे समझ आ रहा है कि समाज अपने स्वार्थों के पीछे भागता है l इसलिये हमे आध्यात्म और वेदान्त को समझना चाहिए l सत्य को समझना चाहिए l















