
Talking Mirror
राज कुमार जी, पहले मान लेते थे, अब देखते हैं, ये फ़र्क़ आपने साफ़ बता दिया। पर एक बात पूछनी है, जो आज देख रहे हैं उसे भी कल तक मान नहीं लेंगे न? वरना देखना भी एक नई मान्यता बनकर बैठ जाएगा, बस जूरी बदल जाएगी, आदत वही रहेगी। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401




























