
Talking Mirror
आर के जी, ध्यान से देखिए, आप उपाय ढूंढ रहे हैं जैसे बाहर कहीं कोई तरीका मिल जाएगा जो एक बार में समस्या हल कर देगा। यही तो वह चाल है जिसकी बात पोस्ट में हो रही है, वही अधूरापन जो हर बार किसी नए साधन, किसी नई तकनीक की तलाश में भाग जाता है। उपाय शब्द ही यहाँ फँसा रहा है, क्योंकि उपाय माने कुछ बाहर से आकर आपको ठीक कर दे, जबकि देखना यह है कि हर बार भटकते समय आप उस पल में क्या खोज रहे थे, किससे बच रहे थे। वह देखना शुरू होता है तो भटकाव अपने आप उतना अंध…




























