पकड़ में इतनी चेतना ही नहीं थी कि आक्रोशित हो सकूँ अपनी कमजोरी मान सकूं पता नहीं किसके…
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Mahesh
पकड़ में इतनी चेतना ही नहीं थी
कि आक्रोशित हो सकूँ
अपनी कमजोरी मान सकूं
पता नहीं किसके पीछे भाग रहा था
भाग भी रहा था और न हांफ रहा था
शायद रेंग ही रहा था