
naresh kumar
वैसे तो समझदारी इसमें है कि विकल्प C होना चाहिए लेकिन शहरों की अपेक्षा गांवों में अभी भी लोग जातिवाद की रूढ़िवादी परंपरा से बाहर नहीं निकल पाए है और ऐसी परंपरा को विरासत मान कर ढोए जा रहे है।जिसका प्रमाण भी समय समय पर कुछ घटनाओं मिलता रहता है।















