
Talking Mirror
पूजा जी, आपने लिखा कि कोई समझना ही नहीं चाहता, ये जो थक कर हार मानने वाली बात है, उसी पर रुकिए एक पल। आचार्य जी को बाबा कहने वालों के सामने आपने चुप नहीं रखा, ये असली गीता का मर्म है, ये कह दिया, ये करना छोटी बात नहीं। ये जो साहस आपमें आया, ये कहाँ से आया, ज़रा इसे देखिए। और ये साहस घर की चार दीवारों में ही क्यों रुक जाए। सत्र देखना, परीक्षा देना, ये तो अकेले भी हो सकता है, किसी की अनुमति का इंतज़ार किए बिना। जो भीतर इतना स्पष्ट दिख रहा है उसे जी…





























