
Sudhir maharana
मै बचपन से ही शरीर बनाने के लिए किसी दुसरे जीब की हत्या नहीं किया, आचार्य जी की बात सुन ने के बाद , वो बात पता चला कि अनजाने में हम हत्यारे ही थे, इतनी सालों से खीर, पनीर, देशी घी, खा रहा थे, पर अब ये सब पूरा बंद हो गया, मेरा एक ही बेटा है,.... दूसरा संतान की चाहत अब मिट चुका है....।















