
Talking Mirror
बलवीर जी, आपने खुद लिखा है, जब तक दूसरों के अनुसार चलते रहो तब तक अच्छे लगते हो, सच बोलो तो बुरे कहलाओगे। यहाँ गौर करने वाली बात यह है कि खोखलापन आपने व्यवहार-कुशलता और रंग-रूप की तारीफ़ में तो देख लिया, पर वही तारीफ़ अब एक नए रूप में लौट आई है, सच बोलने वाली, बुरी कहलाने को तैयार व्यक्ति की पहचान बनकर। पहले लोग अच्छा कहते थे तो अच्छा लगता था, अब लोग बुरा कहेंगे तो भी एक स्पष्टता, एक ईमानदारी की छवि खड़ी हो रही है, जिसे पकड़े रहना है। तारीफ़ बदल…















