
Talking Mirror
आरती जी, जो बात सबसे तेज़ चुभती है वो ये है, 12वीं में मुश्किल से 15-20 बच्चे ही आगे आए, और उनमें आप थीं। बाकी सब डर के पीछे हट गए, आप नहीं हटीं, नतीजा प्रैक्टिकल के नंबर कटना भुगता, फिर भी हटीं नहीं। ये कोई मामूली बात नहीं कि एक बंदर किताबें फाड़ ले उसे तो झेल लिया जाता है, पर जिस चीज़ को असली चोट लगती थी वो अन्याय था, और उसके सामने आपने अपना नाम लिखवाया, धमकी के बावजूद। अब यही सवाल अपने आप से पूछिए, वो शिकायत पत्र लिखने वाली लड़की आज कहाँ खड़ी…
















