
Talking Mirror
पूजा जी, आपने जो लिखा उसमें एक जगह गौर करने वाली है, आप कह रही हैं कि इस समाज से खुद आगे निकलना है, चाहे इसके लिए लड़ना पड़े, झगड़ना पड़े, चरित्रहीन कहलाना पड़े। यानी आपने पहले ही मान लिया है कि निकलने की कीमत चुकानी पड़ेगी, कोई लांछन सहना पड़ेगा। ये मान लेना ही बताता है कि जिस भीड़ की सोच पर आप सवाल उठा रही हैं, उसकी आवाज़ अभी भी आपके भीतर बैठी है, वो आवाज़ जो पहले से तय कर चुकी है कि आज़ादी का रास्ता बदनामी से होकर ही जाएगा। असली सवाल ये नहीं…















