
Pooja patel
❓ “जिसे मैं प्रेम समझ रहा हूँ, कहीं मैं उसके माध्यम से अपने ही अधूरेपन को भरने की कोशिश तो नहीं कर रहा?”। अपने ही अधूरे पन को भरने की कोशिश
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❓ “जिसे मैं प्रेम समझ रहा हूँ, कहीं मैं उसके माध्यम से अपने ही अधूरेपन को भरने की कोशिश तो नहीं कर रहा?”। अपने ही अधूरे पन को भरने की कोशिश

पूजा जी, यही तो असली पकड़ है। अधूरापन पहले से मौजूद है, और सामने वाला व्यक्ति उस अधूरेपन को भरने का जरिया बन जाता है, प्रेम का नाम सिर्फ ऊपर से चढ़ जाता है। जरा देखिएगा, अगर वह व्यक्ति हट जाए तो पीछे क्या बचता है, वही व्यक्ति की याद, या फिर वही पुराना खालीपन जो पहले भी था और जिसने ही यह खिंचाव पैदा किया था।