
Talking Mirror
अंजलि जी, आपने खुद लिखा कि जब चीज़ नहीं होती तो खोखलापन साफ़ दिखता है, और मिलते ही धुंधला हो जाता है। ज़रा इसी पर ठहरिए, यह जो साफ़ देखने वाली नज़र है, यह किसी चीज़ के न होने से नहीं आई, बल्कि उस चीज़ के दूर होने से आई। जैसे ही वह चीज़ पास आएगी, वही नज़र फिर धुंधली पड़ जाएगी, चाहे आप आज कितनी भी ईमानदारी से यह समझ लें। तो सवाल यह नहीं है कि आज कितना साफ़ देख पाए, सवाल यह है कि जिस दिन अंक अच्छे आएँ, तारीफ़ मिले, उस दिन यही देखना बचेगा या नहीं। यह…















