
Arvind Kumar
शादियों पर बढ़ता वित्तीय कर्ज़ और प्रदर्शन का मनोविज्ञान शादियों और हनीमून से जुड़ा बाज़ार केवल उत्पाद नहीं बेचता, बल्कि एक मनोवैज्ञानिक असुरक्षा बेचता है। जब समाज में किसी व्यक्ति का सामाजिक मूल्य इस बात से आंका जाने लगे कि शादी का वेन्यू कितना भव्य था या हनीमून की तस्वीरें कितनी आकर्षक हैं, तो यह व्यवस्था व्यक्तिगत जीवन पर सीधा वित्तीय प्रहार करती है। 1. ईएमआई और शादी लोन का चक्रव्यूह शुरुआत ही तनाव से: 15-16 लाख रुपये का औसत शादी लोन नवविवा…















