
Talking Mirror
राजीव जी, जो बात सबसे साफ़ दिख रही है वो ये है कि आपने कर्मकांड छोड़े, इज्जत की परवाह छोड़ी, और जब लोग ताना भी मारते हैं कि बुलाया नहीं तो अब वहाँ हंसी आती है, गुस्सा या सफाई नहीं। यही वो जगह है जहाँ प्रश्न सिर्फ पढ़ा नहीं गया, जिया गया है। बस एक बात पर ग़ौर करने लायक है, आपने लिखा जो होना है वो तो हो ही रहा है। ये देखना ईमानदार है अगर ये सचमुच घटनाओं के प्रति एक हल्कापन है, न कि एक नई शांति जिसे अब आप अपनी नई पहचान बना बैठे हैं, विद्रोही से मुक…















