
Ekta Kumari
बुद्धिमान होने के लिए संयोग की आवश्यकता नहीं होती। लेकिन जब मैं अपने आप को देखती हूं तो समझ आता है कि मैं सामने वाले से ये उम्मीद करती हूं कि वो मुझसे कहे कि तुम बुद्धिमान हो जिससे शरीर के द्वारा किए गए काम पर मैं अपना नाम लिख सकूं । और फिर ऐसा ही होता हैं कि मैं शरीर के द्वारा किए गए काम पर अपना नाम स्थापित करने लग जाती हूं कि आखिर मेरी भी कोई पहचान है। बुद्धिमान होना, न होना तो बाद की बात है। इसलिए अब समझ आया कि मैं बुद्धिमान नहीं हूं बस शरीर क…















