
Ranjan Naghare
और जिस पल यह वाक्य बनता है कि हाँ, मैंने देख लिया कि यह अधिकार जमाना ग़लत है, उसी पल कोई भीतर खड़ा होकर कह रहा है, यह सही देखना मेरा है। जिस चीज़ को आपने पहचाना, वही पहचान अब ख़ुद एक नई कमाई बनकर खड़ी हो जाती है। सही देखने को भी मैने अपना बना लिया जब यह जवाब मै लिख रहा था तब मैं यह नहीं देख पाया किंतु अब साफ नजर आ रहा है कि कैसे मैं हर पल में अपने आपको इस शरीर का मालिक या चालक बना लेता हूं। क्या उसी पल में यह जानने की प्रक्रिया नहीं हो पाएगी?















