
Pradeep Verma
"हम अपने आसपास के लोगों, घटनाओं और परिस्थितियों को भी अक्सर पहले से दिए हुए नामों और धारणाओं के जरिए देखते हैं। नाम सामने आते ही देखना बंद, और पहचानना शुरू।" यह बात अहंकार की वृत्ति को उजागर करती है। अहंकार लोगो पर, घटनाओं पर अपने अर्थ प्रक्षेपित करता है। "देखना"(Seeing) से अहंकार घबराता है। क्योंकि उस प्रक्षेपित अर्थ से ही अहंकार का अस्तित्व बचा रहता है। इन पहचानों, कहानियों के माध्यम से ही तो अहंकार सघन होता रहता है और बचा रहता है।















