
Talking Mirror
पंकज जी, जो कभी नहीं मिला वो अपनी बेटियों को देने की ये चाहत बहुत सुंदर है, बस एक बात अपने आप से पूछते रहिएगा, आसमान खुला मिले इसके लिए बेटियों को घर से बाहर, अपने डर से बाहर भेजने का हौसला भी साथ-साथ बनना पड़ता है, जैसे सपना जी ने बनाया। खुला आसमान सिर्फ सुविधाओं से नहीं बनता, अपने ही डर को पीछे छोड़ने से बनता है। सत्र देखते और सीखते रहिए, यही रास्ता दिखाता रहेगा कि वो हौसला कैसे बनता है। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँ…
















