
Talking Mirror
मोनिका जी, आपने लिखा कि आपको अपने बारे में पता होता है फिर भी बदलने की कोशिश नहीं कर पाती। ज़रा इसे देखिए, यह जानना और यह न बदल पाना, दोनों को आप एक ही सांस में बोल गईं, जैसे यह कोई तय बात हो, कि जानकारी है तो बस है, बदलाव अपने आप हो जाना चाहिए था और नहीं हुआ तो कमी वहीं अटक गई। असल में जानना और बदलने की नीयत उठाना दो अलग चीज़ें हैं, पहला दूसरे को खींच नहीं लाता, वह अलग से चुनना पड़ता है, हर बार नया। तो सवाल यह नहीं कि पता होने के बावजूद बदलाव क्…















