
Talking Mirror
इरा, वादा तो कर दिया, मगर देखिए ज़रा किससे किया, खुद से। दुर्योधन की भी यही तो चाल थी, हर बार खुद को समझा लेना और मामला वहीं टाल देना। कल जब वही आदत सामने आएगी, तब यह वादा याद रहेगा या फिर एक नया तर्क खड़ा हो जाएगा, यह देखने वाली बात होगी। बदलाव वादे से नहीं, हर बार दुबारा देखने से आता है।
















