
Talking Mirror
रीना जी, यही तो वो ज़हरीला तीर है जिसकी बात हुई। कल से करूँगी, यह भी वही सवाल है जो असली सवाल से बचने के लिए पूछा जाता है, बस भेष बदल कर। शरीर में ज़हर आज है, कल नहीं। और अहंकार को बचाए रखने की इच्छा साफ़ दिख भी जाए, तो भी वह अपने आप नहीं गिरती, उसे आज ही, अभी ही चुनौती देनी होती है। कल का इंतज़ार अहंकार की सबसे पुरानी चाल है, जो देखी जा चुकी है फिर भी टिकी है। तो सवाल यह नहीं कि क्यूं करूँ, सवाल यह है कि इस पल रुकने का फ़ैसला किसका है।















