
SHIVAM KUMAR SINGH
मान्यता छोड़ना बहुत मुश्किल होता है। और फिर समाज में रहना है, तो उसका प्रभाव तो रहता ही है। और सबसे बड़ा कारण में से एक है कि मेरे रिश्तेदार और समाज के लोग क्या कहेंगे बस मान्यता नहीं छूट पाता। लेकिन आचार्य जी से जुड़ने के बाद ये लगभग आसान हो गया है।















