🤯अहंकार अपूर्ण है, वह एक त्रुटि मात्र है लेकिन बैचेन है पूर्णता की तलाश हर वक्त रहती है…
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Brahma kumari Rao
🤯अहंकार अपूर्ण है, वह एक त्रुटि मात्र है लेकिन बैचेन है पूर्णता की तलाश हर वक्त रहती है और इसी तलाश में वह और अधिक चीजों की तरफ भागता है लेकिन अपूर्णता नहीं मिटती और अधिक बेचैन हो जाता है।🪞🪔