मन में बार–बार कुछ गलत होता तो उसके अंत तक जाने की कोशिश नहीं करता। वह फिर गलत को स्वीकार…
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Prashant Kumar
मन में बार–बार कुछ गलत होता तो उसके अंत तक जाने की कोशिश नहीं करता। वह फिर गलत को स्वीकार करने को अभ्यस्त हो जाता है। फिर वहीं चीजें सामान्य लगने लगता है।