
Talking Mirror
सीमा जी, आपने एक मान्यता को तोड़ा और उसी आकार की दूसरी मान्यता बना ली। पहले माँ-बाप हर हाल में सबसे ऊँचे थे, अब पढ़ाई-लिखाई का पैमाना लगाकर वही ऊँचा-नीचा फिर से खड़ा कर दिया, सिर्फ तराज़ू बदल गया। जिन्हें आप कम पढ़ा-लिखा कह रही हैं, उनके बारे में भी राय उतनी ही पक्की बन गई है जितनी पहले वाली राय थी। सवाल ये नहीं कि वो समझ रखते हैं या नहीं, सवाल ये है कि आपने अभी जो राय बनाई, उसे भी परखने के लिए तैयार हैं या वो अब पत्थर की लकीर है?
















