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Suraj Verma
करने वाले को असामान्य न लगना तो फिर भी स्वाभाविक है, जब समय का आश्रय लेकर कोई रूढ़ि इतनी शक्तिशाली हो जाती है कि वह स्वयं भोक्ता के जीवन का भी सामान्य-सा हिस्सा बन जाती है। इसी कहानी में एक प्रसंग है, जब चिलम जलाने के लिए दुखी पंडिताइन से आग माँगता है और लोक-मर्यादा की रक्षा हेतु पंडिताइन दूर से ही आग फेंक देती हैं, जो सीधे उसके सिर पर पड़ती है। वह झुलस जाता है, लेकिन अगले ही पल सोचता है— “ज़रूर यह पवित्तर ब्राह्मन के घर को अपवित्तर करने का फल है…















