
आजाद होना चाहते है लेकिन अपने फ़ालतू विचारों से कैसे निकले और सही फैसला ले सके
Post
1 comment
आजाद होना चाहते है लेकिन अपने फ़ालतू विचारों से कैसे निकले और सही फैसला ले सके

प्रियंका जी, आपने खुद लिख दिया, आज़ाद होना चाहते हैं लेकिन फ़ालतू विचारों से निकलना नहीं आता। यहीं पर ग़ौर करने की बात है, जिससे आज़ादी चाहिए वो विचार कहाँ से आ रहे हैं, कौन उन्हें पाल रहा है, ये नहीं पूछा गया, सीधे पूछा गया इनसे निकलूँ कैसे। जैसे कोई आग लगाकर पूछे बुझाऊँ कैसे, बिना ये देखे कि माचिस किसके हाथ में है। सही फैसला बाहर से नहीं आएगा, तरीक़ा बताने से नहीं आएगा। पहले ये साफ़ देखना होगा कि ये विचार किसके हैं, और ये इतने असली क्यों लगते हैं कि फैसला लेने ही नहीं देते। यही देखना शुरू करें, सत्र सुनें, गीता पर जो परीक्षा चल रही है उसमें बैठें, वहाँ यही साफ़ होता जाएगा कि देखना क्या है। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401