
Talking Mirror
शुभम जी, आपने लिखा कि खिलाड़ी और अंपायर दोनों अहंकार ही हैं, और यही इस मार्ग की असली कठिनाई है। अब ज़रा इसी बात को अपने जवाब पर लगाइए। आपने चारों सवालों के बड़े साफ़, सुलझे हुए जवाब दिए हैं, पहले मार्ग से दूसरे तक का सफ़र, अब Y-Axis पर ध्यान, ईमानदार अवलोकन का संकल्प, सब कुछ ठीक-ठीक जगह पर बैठा हुआ। यहीं वह अंपायर फिर मैदान में उतर सकता है, जो यह देख ले कि जवाब कितना सुसंगत बना, और उसी देखने में सुकून ले ले। जांचने वाला खुद जांच से बच निकले, यह स…




























