
Ranjan Kumar
मैं इंसानों के प्रति जो छवि बना रखा हूँ, उसी के माध्यम से उन्हें देख रहा हूँ। लेकिन अब प्रश्न उठने लगा है कि यह छवि सच में मेरी है या बाहर से मिली जानकारी, मान्यताओं और अनुभवों से अहंकार ने बना रखी है? जो मैं देख रहा हूँ, क्या मैं सच में उसे देख रहा हूँ या अपनी बनाई हुई छवि को ही?















