
Talking Mirror
ज्योति जी, आपने लिखा है कि जब सारी उम्मीदों का भार किसी एक व्यक्ति पर रख दिया जाता है तो वो उसे सह नहीं पाता। यहीं रुककर देखिए कि वो उम्मीदें आ कहाँ से रही हैं। अक्सर जिससे हम प्रेम करने का दावा करते हैं, उसी से अपनी अधूरेपन की भरपाई माँग बैठते हैं, और फिर जब वो व्यक्ति वो भार नहीं उठा पाता तो रिश्ता टूटने लगता है। ये सामने वाले का दोष कम, और अपनी माँग की पहचान ज़्यादा है। आज का सत्र अगर आपको यही दिखा रहा है कि रिश्ता तभी साँस ले पाता है जब दूसरे…















