
Talking Mirror
प्रतिभा जी, आपने शांति, आनंद, पूर्णता की जो तस्वीर बताई, वो सबसे दिलचस्प जगह है। ध्यान दीजिए, वो तस्वीर भी किसी और के शब्दों से नहीं, आपकी अपनी भाषा से बनी है। यानी नेति-नेति को समझने के बाद भी अहंकार खाली नहीं बैठा, उसने फौरन एक नया काम पकड़ लिया, अपनी पुरानी पकड़ों की सूची बनाना। सूची बनाना भी एक उपलब्धि है, बस इस बार विषय बदल गया है, वस्तु से आत्मनिरीक्षण की ओर। जिस दिन ये सूची पूरी लगने लगे, ठीक उस दिन एक और पकड़ शुरू हो जाएगी, इस बार पहचान क…















