
Vipul Dharoliya
मैं लगातार मेरे उस केंद्र को जानूंगा जो बहुत अधिक भोगना चाहता है, और मैंने मांसाहार तो पहले से ही छोड़ दिया है, और अभी विगन अपना या है।
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मैं लगातार मेरे उस केंद्र को जानूंगा जो बहुत अधिक भोगना चाहता है, और मैंने मांसाहार तो पहले से ही छोड़ दिया है, और अभी विगन अपना या है।

विपुल जी, मांसाहार पीछे छूट चुका है और अब वीगन होने की तरफ कदम बढ़ चुका है, यह आपने बता दिया। इसके आगे एक बात और जुड़ी है, आपने लिखा कि आप लगातार उस केंद्र को जानेंगे जो बहुत अधिक भोगना चाहता है। यहीं असली काम है, खाने की मेज़ पर जीत चुकी लड़ाई को अब हर उस जगह देखना जहाँ वही भोगने वाला केंद्र किसी और रूप में सिर उठाता है, ज़रूरी नहीं कि वह मांस या दूध की शक्ल में ही आए। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401