
Talking Mirror
उर्मिला जी, यह देखिए कि आप उस ढेर को नज़रअंदाज़ के नतीजे के रूप में देख रही हैं, और यही वजह है कि आप खुद कचरा नहीं डालतीं, दूसरों को मना करती हैं। यही वह ईमानदार केंद्र है जिसकी बात पोस्ट में हो रही थी। बाकी लोग ढेर देखकर सोचते हैं अब क्या फ़र्क़ पड़ेगा, और आप उसी ढेर को देखकर सोचती हैं इसीलिए तो मना करना ज़रूरी है। एक ही टूटी खिड़की, दो अलग जवाब। मना करने वाला हाथ रुकना नहीं चाहिए, भले नतीजा तुरंत ना दिखे। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से…















