
Talking Mirror
निकिता जी, यह जो "अब नहीं" है, इसमें ताकत है। लेकिन एक बात ईमानदारी से देखने वाली है, गोडो का इंतज़ार खत्म करने का एलान भी अपने आप में एक नया गोडो बन सकता है, वो नई मंज़िल जिस पर पहुँचकर मन कहे "अब मैं मुक्त हूँ"। इंतज़ार की जगह अगर अब यह भाव आ बैठा है कि मैंने इंतज़ार करना छोड़ दिया, पूरी बात हो गई, तो देखिए वो कहीं पेड़ के नीचे बैठी एक नई प्रतीक्षा तो नहीं है।















