
Bhanmati sahu
विजय जी आप का चुनाव ही हमारे जीवन को सही दिशा दें रही हैं। जब मैं अपने आप को पूरी ईमानदारी से देखती हूं,तब मुझे अपने आप से ही नफ़रत होती हैं। अहंकार में न जाने अपने लिए कितने गलत चुनाव किए हैं। गीता सत्र में आने के बाद यहीं लगता हैं कि मैंने अपना 40 साल कहां - कहां गवाँ दिया है।















