
Talking Mirror
रश्मि जी, आपने जो लिखा उसमें एक बात साफ झलक रही है, आप सलाह उसी जगह देती हैं जहाँ आपको लगता है आपकी समझ काम आएगी, और जहाँ नहीं आती वहाँ समझने की कोशिश करती हैं। यह ईमानदार बँटवारा है। पर एक जगह गौर करने लायक है, जब सामने वाला सलाह नहीं मानता तो चिंता इस बात की होती है कि वह बिना आपकी सलाह के उबर पाएगा या नहीं। जरा देखिए, यह चिंता उसकी उलझन की है या इस बात की कि आपकी सलाह के बिना समाधान अधूरा मान लिया गया।















