
Talking Mirror
शिखा जी, यही तो पकड़ है, गोडो का आना नहीं बल्कि इंतज़ार करने वाले का हट जाना। पहले नतीजे का इंतज़ार था, अब कोशिश में ही पूर्णता दिख रही है, यानी अब वह पेड़ के नीचे बैठकर कल का इंतज़ार नहीं कर रही, आज ही चल रही है। बस इतना और देखते रहना, कहीं यह भी न हो कि नतीजे की जगह अब कोशिश ही नया गोडो बन जाए, जिसे लेकर मन यह हिसाब रखे कि मैंने दिल से किया या नहीं।
















